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रेकी मास्टर - डॉ अविनाश महाजन
HOLY FIRE ||| REIKI MASTER TEACHER & KARUNA REIKI MASTER TEACHER and JIKIDEN REIKI PRACTITIONER


उसुई/होली फायर ।।। रेकी रोहो


● रेकी चिकित्सा (Reiki Treatment) :-

रेकी (霊気 या レイキ?, आईपीए: /ˈReikiː/) एक आध्यात्मिक अभ्यास पद्धति है। जिसका विकास 1922 में मिकाओ उसुई ने किया था। यह तनाव और उपचार संबंधी एक जापानी विधि है, जो काफी कुछ योग जैसी है। मान्यता के अनुसार रेकी का असली उदगम स्थल भारत है। सहस्रों वर्ष पूर्व भारत में स्पर्श चिकित्सा का ज्ञान था। अथर्ववेद में इसके प्रमाण पाए गए हैं। यह विद्या गुरु-शिष्य परंपरा के द्वारा मौखिक रूप में विद्यमान रही। लिखित में यह विद्या न होने से धीरे-धीरे इसका लोप होता चला गया। ढाई हजार वर्ष पहले बुद्ध ने ये विद्या अपने शिष्यों को सिखाई जिससे देशाटन के समय जंगलों में घूमते हुए उन्हें चिकित्सा सुविधा का अभाव न हो और वे अपना उपचार कर सकें। भगवान बुद्ध की 'कमल सूत्र' नामक किताब में इसका कुछ वर्णन है। यहाँ से यह भिक्षुओं के साथ तिब्बत और चीन होती हुई जापान तक पहुँची है। जापान में इसे पुनः खोजने का काम जापान के संत डॉक्टर मिकाओ उसुई ने अपने जीवनकाल 1869-1926 में किया था। इसकी विचारधारा के अनुसार ऊर्जा जीवित प्राणियों से ही प्रवाहित होती है। रेकी के विशेषज्ञों का मानना है कि अदृश्य ऊर्जा को जीवन ऊर्जा या (की) कहा जाता है और यह जीवन की प्राण शक्ति होती है। विशेषज्ञ कहते हैं कि (की) हमारे आस-पास ही है और उसे मस्तिष्क द्वारा ग्रहण किया जा सकता है।

REIKI मूलतः जापानी शब्द है जो दो शब्दों से (Rei + ki) मिलकर बना है- रे तथा की। REI अर्थात रे का अर्थ होता है जो सर्वत्र व्याप्त है, और की का अर्थ है ऊर्जा – प्राणशक्ति ऊर्जा। संस्कृत शब्द "प्राण" इसी का पर्यायवाची है। चीन में इसे 'ची' कहा जाता है। इस प्रकार रेकी का अर्थ - "सर्वव्यापी प्राणशक्ति ऊर्जा है।" कई लोग इसे संजीवनी शक्ति भी कहते हैं। विभिन्न लोगों द्वारा किए गए शोध के अनुसार यह निष्कर्ष निकला है कि इस विधि को आध्यात्मिक चेतन अवस्था या अलौकिक ज्ञान भी कहा जा सकता है। इसे सर्व ज्ञान भी कहा जाता है जिसके द्वारा सभी समस्याओं की जड़ में जाकर उनका उपचार खोजा जाता है। समग्र औषधि के तौर पर रेकी को बहुत पसंद किया जाता है। रेकी की मान्यता है कि जब तक कोई प्राणी जीवित है, ‘की’ उसके गिर्द बनी रहती है। जब ‘की’उसे छोड़ जाती है, तब उस प्राणी की मृत्यु होती है। विचार, भाव और आध्यात्मिक जीवन भी ‘की’ के माध्यम से उपजते हैं।

रेकी को "अध्यात्मिक उपचार पद्धति" के नाम से भी जाना जाता है। यह पूर्ण रूप से प्राकृतिक तथा सुरक्षित पद्धति है। इसका किसी धर्म या जाति विशेष से कोई संबंध नहीं है।

दूसरे शब्दों में कहूँ तो रेकी तकनीक का प्रयोग कर इंसान आसानी से अपने अंदर की विद्यमान शक्तियों (कुण्डलिनी शक्ति) को जागृत कर सुखी तथा परिपूर्ण जीवन जी सकता है। ऊर्जा के कई प्रकार होते हैं। मानव शरीर के लिए ये ऊर्जा अति आवश्यक है। शरीर को चलाने के लिए भोजन चाहिए। भोजन से जो ऊर्जा मिलती है वह किसी अन्य चीजों से नहीं मिलती। जब शरीर के किसी हिस्से में ऊर्जा अवरुद्ध हो जाती है तो उस हिस्से में समय के साथ बीमारी उत्पन्न हो जाती है। बीमारियों को ठीक करने के लिए मनुष्य तुरंत दवाइयों का सहारा लेता है। दवाइयाँ रसायन ऊर्जा हैं, जो शरीर के उस भाग में अवरूद्ध साफ़ कर ऊर्जा को प्रवाहित करती हैं।

इंसान का शरीर ऊर्जा की सात परतों से बना है, दूसरे शब्दों से इसे "औरा" कहते हैं। यह हमारे शरीर के चारों ओर चार से छह इंच तक का एक घेराव होता है। एक स्वस्थ व्यक्ति का औरा उसे बीमारियों से सुरक्षित रखता है। वहीं रोगी व्यक्ति का औरा सिकुड़ जाने के वजह से वह जल्दी से बीमारियों की चपेट में आ जाता है।

मानव शरीर के अंदर कुल २४ मुख्य ऊर्जा के केंद्र हैं जिन्हें हम चक्र के नाम से जानते हैं। जिनमें "सात प्रमुख चक्र" हैं। रेकी हीलर अपने हाथों से इन चक्रों के माध्यम से ऊर्जा को रोगी के शरीर में प्रवाहित करता है।

रेकी थेरेपी एक तरह से ध्यान विधि भी कह सकते हैं। जो मन की गहराइयों में जाकर, दबे हुए विचारों, यादों, दर्द को बाहर निकाल उस जगह ऊर्जा का प्रवाह करती है। शुद्ध तथा ताज़ी हवा के समान शरीर और मन के उस हिस्से में एक ताज़गी भर देती है। परिणामस्वरूप बीमारियाँ ठीक होने लगती हैं।


● नजदीकी रेकी थेरेपी -
रेकी थेरेपी (Treatment) के लिए आपको रेकी हीलर के पास जाना होता है। रेकी हीलर आपके शरीर के अंगों को हल्के से स्पर्श करके आपके शरीर में रेकी ऊर्जा का संचार करता है तथा आपका औरा शुद्ध करता है। आपके सात चक्रों को संतुलित करता है। आपकी शारीरिक, मानसिक, भावनिक तथा अन्य किसी भी समस्या को दूर करता है।


● दूरस्थ रेकी थेरेपी -
रेकी थेरेपी (Treatment) के लिए आपको रेकी हीलर के पास जाने की जरूरत नहीं होती। वह आपके आभामंडल में पॉजिटिव्ह मैसेज को प्रवाहित करता रहता है जिससे आप अपने आप को स्वस्थ महसूस करते हैं और वह प्रवाह कैसे करता है, जैसे मोबाईल फोन चलता है और वेव्स को इस्तेमाल करते हैं वैसे ही हम भी उसको इस्तेमाल करते हैं क्योंकि हमारा प्रेम एक शक्तिशाली कंप्यूटर है जिसके आगे मानव निर्मित कंप्यूटर बिल्कुल फेल है और हम अपने ब्रेन को इस तरह से ट्यून कर लेते हैं कि हम किसी भी बीमारी के लिए पॉजिटिव एनर्जी सामने वाले पेशेंट के लिए प्रवाहित कर सकते हैं। हर समय मरीज रेकी हीलर के पास नहीं जा सकता इसलिए इस थेरेपी का प्रयोग किया जाता है। दूरस्थ रेकी थेरेपी यह भी एक प्रभावी पद्धति मानी जाती है...!!!


● रेकी साधना से होनेवाले अविश्वसनीय लाभ -
अपने 10 साल के रेकी अभ्यास से जो अनुभव मैंने किया है उसे आपके साथ यहाँ साझा कर रहा हूँ। इन्हें जानने के बाद हो सकता है आपका विश्वास रेकी में बढ़ जाए।

चिंता, क्रोध, लोभ, उत्तेजना और तनाव शरीर के अंगों एवं नाड़ियों में हलचल पैदा कर देते हैं, जिससे रक्त धमनियों में कई प्रकार के विकार उत्पन्न हो जाते हैं। शारीरिक रोग इन्हीं विकृतियों के परिणाम हैं। शारीरिक रोग मानसिक रोगों से प्रभावित होते हैं। रेकी बीमारी के कारण को जड़ (मूल) से नष्ट करती है, स्वास्थ्य स्तर को उठाती है।‌ रेकी बीमारी के लक्षणों को दबाती नहीं हैं, बल्कि बीमारी को जड़ से ही नष्ट कर देती है। रेकी के द्वारा मानसिक भावनाओं का संतुलन होता है और शारीरिक तनाव, बैचेनी व दर्द से छुटकारा मिलता जाता हैं।

रेकी गठिया (संधिवात), दमा, कैंसर, रक्तचाप, पक्षाघात, अल्सर, एसिडिटी, पथरी, बवासीर, मधुमेह, अनिद्रा, मोटापा, गुर्दे के रोग, आंखों के रोग , स्त्री रोग, बाँझपन, शक्तिन्यूनता और पागलपन तक दूर करने में समर्थ है। इसके द्वारा विशिष्ट आदर्शो के अधीन रहना होता है।


● शारीरिक लाभ (Physical Benefits of Reiki) -

1) रेकी द्वारा किसी भी पुरानी बीमारी जैसे कि कैंसर, डायबिटीज, अस्थमा आदि को ठीक होते पाया गया है।
2) रेकी अभ्यास करने वालों की रोग प्रतिकार शक्ति बढ़ जाती है। जिसके परिणाम स्वरूप उन पर कोई भी वायरल कीटाणुओं का जल्दी से असर नहीं होता। होता भी है तो ये लोग जल्दी से ठीक हो जाते हैं।
3) रोज़ाना रेकी का अभ्यास करने से जलने या कटने से के घाव जादुई तरीके से बहुत ही जल्दी ठीक हो जाते हैं।
4) कितना भी पुराना मायग्रेन या कोई अन्य शारीरिक दर्द कुछ हफ्तों के अभ्यास से ही जड़ से खत्म हो सकते हैं।
5) रेकी के अभ्यास से आँखों की रोशनी बढ़ती है। तथा आँखों से संबंधित बीमारियाँ ठीक हो जाती हैं।
6) नाक, कान तथा गले से संबंधित बीमारियों को रेकी उपचार द्वारा ठीक किया जा सकता है।
7) पेट से संबंधित बीमारियों में रेकी उपचार अत्यंत प्रभावी है। पथरी (Stone) की समस्या को रेकी द्वारा ठीक होते पाया गया है।
8) जोड़ों के दर्द में रेकी उपचार रामबाण का काम करती है।
9) शरीर से toxins को बाहर निकालकर शरीर के सभी अंगों को स्वस्थ रखने में रेकी सहायक है।


● Note - किसी पुराने रोग की अवस्था में यदि दवा के साथ रेकी हीलिंग की गई तो दवा का असर बढ़ जाता है तथा परिणाम जल्दी मिलते हैं।


● मानसिक लाभ (Mental Benefits of Reiki) -
1) रेकी तनाव, चिंता तथा किसी भी प्रकार के अवसाद की स्थिति में तुरंत आराम देती है।
2) किसी भी तरह के मेंटल blockage को साफ़ कर इंसान को सही फैसले लेने में रेकी सहायक है।
4) मन में चल रहे निरर्थक तथा नकारात्मक विचारों को बाहर निकालकर मन को केंद्रित करने में अर्थात फोकस बढ़ाने में रेकी मदद करती है।
5) अनिद्रा की समस्या रेकी अभ्यास अथवा उपचार से आसानी से खत्म हो जाती है। रेकी मानसिक शांति प्रदान करती है।
6) किसी भी प्रकार की भावनात्मक अर्थात emotional दर्द से रेकी छुटकारा दिलाकर खुश रहने तथा जीवन को बेहतर बनाने में सहायता करती है।
7) शारीरिक तथा मानसिक शक्ति में वृद्धि कर, जीवन को बेहतर बनाने में रेकी अत्यंत फायदेमंद है।


● अध्यात्मिक लाभ - (Spiritual Benefits of Reiki) -
1) रेकी अभ्यास मनुष्य को उसके प्राकृतिक स्वरूप से जोड़ने में मदद करती है। 2) रेकी साधना कुण्डलिनी शक्ति को जागृत करने का सबसे आसान माध्यम है। 3) Detachment तथा साक्षी भाव बढ़ाने में रेकी अत्यंत सहायक है। 4) Law of Attraction अर्थात आकर्षण के नियम को जीवन में प्रयोग करने में रेकी मदद करती है। 5) मन बुद्धि तथा शरीर का सामंजस्य कर जीवन में सुख शांति फ़ैलाने में रेकी सहायक है।


● अन्य लाभ -
1) रेकी रिश्तों मे आईं दरारों को दूर करती है। 2) रेकी आर्थिक, व्यावसायिक, औद्योगिक, नौकरी विषयक समस्याओं को दूर करती है। 3) बुरी आदतों को रेकी द्वारा नष्ट किया जाता है। 4) रेकी द्वारा जीवन में सुख शांति लाई जाती है। 5) रेकी से हम किसी भी प्रकार की अभिलाषा या लक्ष तक पहुँच सकते हैं और जीवन में सफलता हासिल कर सकते हैं। 6) जीवन की हर समस्या को रेकी द्वारा हल किया जा सकता है।


● रेकी ध्यान (Reiki meditation) -
जैसा कि मैंने ऊपर ही कहा कि रेकी को ध्यान अर्थात Meditation के रूप में भी अभ्यास किया जाता है।
मैंने अपने छह साल के ध्यान के निरंतर अभ्यास में कई अलग-अलग विधियों का प्रयोग किया है। मैं दावे से कह सकता हूँ कि अध्यात्मिक चिकित्सा में Healing के क्षेत्र में रेकी सबसे शक्तिशाली विधि है।

रेकी उपचार तीन चरण में होता है। या यूॅं कहें कि यदि आप इसका अभ्यास करना चाहते हैं तो आपको "तीन चरण" से गुजरना होगा।

1) प्रथम चरण - इस चरण में आपके सात चक्रों में से चार चक्रों को सक्रिय किया जाता है। उसके बाद ध्यान या साधना द्वारा आपकी शारीरिक तथा मानसिक क्लींजिंग होती है। परिणामस्वरूप किसी भी तरह का मेंटल, इमोशनल ब्लॉकेज क्लियर हो जाता है। जिससे बाकी के चक्र भी सुचारू रूप से सक्रिय हो जाते हैं।
2) द्वितीय चरण - इस चरण में आपके हाथों के चक्रों को सक्रिय कर उसे अभिमंत्रित किया जाता है। रेकी के मंत्रों की मदद से अपने सारे चक्रों को हील करते हैं। इसी दौरान कुण्डलिनी शक्ति का भी लाभ देखने के
लिए मिलता है।
2) तृतीय चरण - इस चरण में पहली दो प्रक्रिया को पूर्ण करने के बाद आप आसानी से स्वयं को तथा दूसरों को भी हील कर सकते हैं।


● रेकी और नुकसान -
काफ़ी सारे लोग इस बात को लेकर शंका में रहते हैं कि रेकी का कोई नुकसान तो नहीं है। तो इसका उत्तर यदि मुझे एक वाक्य में देना हो तो यही होगा कि - “किसी भी प्राकृतिक चीज़ों का मनुष्य पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।"
एक रेकी मास्टर होने के नाते कुछ सलाह ज़रूर देना चाहूँगा। यदि आप किसी से हीलिंग कराना चाहते हैं तो प्रशिक्षित तथा अनुभवी व्यक्ति के पास ही जाएँ।
इससे भी बड़ी सलाह यह दूँगा कि बेहतर होगा कि आप स्वयं किसी अनुभवी तथा पुराने शिक्षक के पास से रेकी का कोर्स कर लें।

स्वयं सीखने की सलाह इसलिए है क्योंकि सेल्फ हीलिंग कम समय में तथा अत्यधिक प्रभावी होती है।


● रेकी क्लास -
रेकी एक साधारण विधि है, लेकिन इसे पारंपरिक तौर पर नहीं सिखाया जा सकता। विद्यार्थी इसे रेकी मास्टर से ही सीखता है। इसे आध्यात्म आधारित अभ्यास के तौर पर जाना जाता है।

रेकी के विशेषज्ञ नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त कर उसे सकारात्मक ऊर्जा में बदलने पर जोर देते हैं। उपचार करते समय रेकी विशेषज्ञ के हाथ गर्म हो जाते हैं। रेकी का इस्तेमाल मार्शल आर्ट़स विशेषज्ञ भी करते हैं। यह विद्या "दो दिन" के शिविर में सिखाई जाती है, जिसमें लगभग पंद्रह घंटे का समय होता है। इस शिविर में रेकी प्रशिक्षक द्वारा व्यक्ति को सुसंगतता ('एट्यूनमेंट' या 'इनिसियेशन' या 'शक्तिपात' या प्लेसमेंट ) प्रदान की जाती है। इससे व्यक्ति के शरीर में स्थित शक्ति केंद्र जिन्हें "चक्र" कहते हैं, पूरी तरह गतिमान हो जाते हैं, जिससे उनमें 'जीनव शक्ति' का संचार होने लगता है। रेकी का प्रशिक्षण मास्टर एवं ग्रैंड मास्टर "पाँच" चरणों में देते हैं।

1) होली फायर ।।। रेकी
(Fist & Second Degree)
अवधि - 2 दिन (हर रोज 7 घंटे)

2) होली फायर ।।। रेकी
(मास्टर क्लास)
अवधि - 3 दिन (हर रोज 7 घंटे)

3) RAGISTERED HOLY FIRE ।।।
करुणा रेकी मास्टर
अवधि - 3 दिन (हर रोज 7 घंटे)

● नोट - रेकी सीखने के लिए एक अच्छे प्रशिक्षित शिक्षक की आवश्यकता होती है। रेकी प्रशिक्षक आपके चक्रों को सक्रिय कर हीलिंग प्रक्रिया को तेज़ करने में सहायता करते हैं। आप ऑनलाईन क्लास द्वारा भी रेकी सीख सकते हैं।
रेकी सीखने के लिए तथा किसी भी प्रकार की (शारीरिक, मानसिक, भावनिक, आध्यात्मिक, आर्थिक, रिश्तों में बिखराव, बुरी आदतों से छुटकारा तथा अन्य किसी भी प्रकार की) समस्याओं का रेकी हीलिंग द्वारा निराकरण करने के लिए संपर्क करें...!!!

● संपर्क स्थल -
श्रीरामपूर -413709
जिला - अहमदनगर (महाराष्ट्र)

● रेकी मास्टर -
डाॅ अविनाश महाजन
होली फायर रेकी मास्टर टिचर
(प्रोफेशनल मेंबर ऑफ रेकी मेंबरशिप असोसिएशन, यूएसए)
● संपर्क - +91 9689324960